बुंडू टोल बूथ का शीशा टूटने पर घंटों रोका गया ट्रेलर, ट्रांसपोर्टर ने लगाए अवैध वसूली के आरोप
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: रांची-टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर एदेलहातु स्थित बुंडू टोल प्लाजा एक बार फिर विवादों में आ गया है. इस बार एक ट्रांसपोर्टर ने टोलकर्मियों पर अवैध वसूली, मनमानी और वाहन को घंटों रोककर परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया है. टोल बूथ का शीशा टूटने की घटना के बाद ट्रेलर को लगभग एक दिन तक रोके जाने से ट्रांसपोर्टर को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
जानकारी के अनुसार ट्रेलर संख्या NL04AA1699 जमशेदपुर स्थित सीसीआई ट्रांसपोर्ट से मध्यप्रदेश के लिए रवाना हुआ था. सोमवार को एदेलहातु स्थित बुंडू टोल प्लाजा से गुजरने के दौरान कथित रूप से ट्रेलर की चपेट में आने से टोल बूथ का शीशा टूट गया. इसके बाद टोलकर्मियों ने वाहन को रोक लिया और चालक से वाहन के कागजात अपने पास रख लिए.
ट्रांसपोर्टर हरमिंदर सिंह का आरोप है कि शीशा टूटने की भरपाई के नाम पर पहले 20 हजार रुपये, फिर 15 हजार रुपये और बाद में 11 हजार रुपये की मांग की गई. उन्होंने बताया कि वह 5 हजार रुपये देने को तैयार थे, लेकिन टोलकर्मी इस पर सहमत नहीं हुए. विवाद बढ़ने पर डायल-112 पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तत्काल कोई समाधान नहीं निकल सका.
हरमिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि ओवरसाइज माल लेकर चलने वाले कई वाहनों से विभिन्न टोल प्लाजा पर बिना किसी आधिकारिक रसीद के 1000 से 2000 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूली जाती है. उनका दावा है कि ऐसे वाहनों को निर्धारित लेन के बजाय अलग रास्ते से निकाला जाता है और इस प्रक्रिया में ली जाने वाली राशि का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस दौरान कोई क्षति हो जाती है तो उसका पूरा बोझ ट्रांसपोर्टरों पर डालने का प्रयास किया जाता है.
ट्रांसपोर्टर ने कहा कि एक दिन तक वाहन खड़ा रहने से माल की डिलीवरी प्रभावित होती है और ट्रांसपोर्ट कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. उनका आरोप है कि टोलकर्मी इस स्थिति का लाभ उठाकर समझौते के लिए दबाव बनाते हैं.
करीब एक दिन तक चले विवाद के बाद मंगलवार दोपहर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ. समझौते के अनुसार टोल बूथ में नया शीशा लगाने का जो भी खर्च आएगा, उसे टोल कंपनी और ट्रांसपोर्टर आधा-आधा वहन करेंगे. इसके बाद ट्रेलर को रवाना कर दिया गया, जबकि वाहन के दस्तावेज टोल प्लाजा में जमा रखने की बात कही गई. हालांकि, इस पूरे मामले में टोल प्लाजा प्रबंधन का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका था. प्रबंधन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.