सूखती नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण

फागुन में ही सूख रहे बानो के मांझी टोली वासियों के हलक, पानी के लिए त्राहिमाम कर रहे ग्रामीण

आशिष शास्त्री/न्यूज11  भारत

सिमडेगा/डेस्क: अभी फागुन का महीना चल रहा है. गर्मी अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई है. लेकिन अभी से हीं बानो के बांकी पंचायत स्थित मांझी टोली में ग्रामीणों के सामने जल संकट विकराल रूप धारण कर लिया है. 

सूरज अभी तपना शुरू भी नहीं किया और बानो के मांझी टोली की हलक सूखने लगी. गांव में पेयजल संकट इस कदर छाया है कि ग्रामीण सूखती नदी का सीना चीर कर पानी इकट्ठे कर, गंदा पानी पीने को मजबूर हो गए हैं. ग्रामीणों ने बताया कि मांझी टोली में पेयजल के लिए लगाया गया जलमीनार पिछले कई महीनों से खराब पड़ा है. जिसके कारण ग्रामीणों को गर दिन पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है. ग्रामीण कई किलोमीटर की दूरी तक कर नदी के बालू हटाकर पानी इकट्ठी करना पड़ता है. फिर इसी गंदे पानी को ग्रामीण उपयोग कर रहे हैं. नदी का पानी साफ नहीं है, जिससे डायरिया, टायफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. गांव की महिला पार्वती देवी ने बताया कि जलमीनार खराब होने से नदी का पानी पीने को मजबूर हैं गांव में कुआं तो है लेकिन वो भी काफी गंदा है इसलिए सभी गांव के लोग नदी का पानी पी रहे . 

इस मामले के बारे में जब मुखिया अजय डांग से बात हुई तो उन्होंने कहा कि बोरिंग धंस जाने के कारण जलमीनार खराब हो गया है जिससे सभी ग्रामीण नदी का पानी पी रहे हैं और कोई भी स्वच्छ पानी पीने का विकल्प नहीं है .

21वीं सदी में विकास के रफ्तार के दंभ भरते देश में सिमडेगा के सुदूर ग्रामीण ईलाके ऐसी तस्वीर विकास के दावों की पोल खोल रही है. इस बदहाल गांव पर सरकार की नजरें इनायत हो जाए तो शायद यहाँ की तस्वीर बदल जाए, और गांव की पतझड़ में भी बहार आ जाए.

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