बिरसा मुंडा हवाई अड्डा में संचार नेविगेशन एवं सर्विलांस विभाग द्वारा ILS और DVOR की सफल फ्लाइट कैलिब्रेशन
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, रांची पर विमान संचालन को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के लिए हवाई अड्डे के संचार, नेविगेशन एवं सर्विलांस (CNS) विभाग द्वारा ILS (Instrument Landing System) और DVOR (Doppler VHF Omnidirectional Range) की सफल फ्लाइट कैलिब्रेशन की गई. इस पूरे कार्य की निगरानी अनिल कुमार कश्यप, संयुक्त महाप्रबंधक (CNS) द्वारा की गई.
ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) एक ऐसी तकनीक है जो खराब मौसम या कम दृश्यता के समय भी विमान को सही दिशा में रनवे तक लाने और सुरक्षित उतरने में पायलट की मदद करती है. वहीं DVOR विमान को हवाई अड्डे की सही दिशा बताने का काम करता है, जिससे पायलट अपनी उड़ान का रास्ता ठीक तरह से तय कर पाते हैं.
इन उपकरणों की समय-समय पर जांच (कैलिब्रेशन) करना जरूरी होता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये सही और सटीक संकेत दे रहे हैं. इसके लिए एक विशेष विमान का उपयोग किया जाता है, जिसमें उन्नत जांच उपकरण लगे होते हैं. यह विमान हवाई अड्डे के ऊपर और आसपास अलग-अलग ऊंचाई और दिशा में उड़ान भरकर इन प्रणालियों के सिग्नलों की सटीकता की जांच करता है. साथ ही जमीन पर मौजूद उपकरणों की भी जांच की जाती है.
इस प्रक्रिया में फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट (FIU) की अहम भूमिका होती है. यह इकाई देशभर के हवाई अड्डों पर लगे नेविगेशन उपकरणों की उड़ान के माध्यम से जांच करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ठीक से काम कर रहे हैं.
यह पूरा कार्य भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के CNS विभाग द्वारा किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से प्रशिक्षित इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर शामिल होते हैं. इन विशेषज्ञों की मेहनत से यह सुनिश्चित किया जाता है कि हवाई अड्डे पर आने-जाने वाले विमानों का संचालन सुरक्षित और भरोसेमंद बना रहे. ये भी पढ़ें- बंगाल-झारखंड में 192 किमी नई रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी, अनुमानित लागत 4474 करोड़ रुपए