रेशमी मेटालिक कंपनी के खिलाफ मैनपावर कर्मचारी और ग्रामीणों का आंदोलन तेज, कार्य बंद कराने की चेतावनी
राहुल कुमार/ न्यूज11भारत
चंदवा/डेस्क: चंदवा प्रखंड क्षेत्र के चकला-बाना गांव स्थित रेशमी मेटालिक कंपनी के प्लांट गेट पर रविवार से मैनपावर कर्मियों एवं प्रभावित ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन फिर से तेज हो गया है.कंपनी प्रबंधन पर वादाखिलाफी, लंबित भुगतान और विस्थापित परिवारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिला प्रशासन को सूचना देकर कंपनी का संचालन पूरी तरह ठप करा दिया जाएगा.
रविवार सुबह से ही प्लांट गेट के बाहर बड़ी संख्या में मैनपावर कर्मी, विस्थापित परिवार और ग्रामीण एकत्रित हुए.आंदोलनकारियों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपने अधिकारों की मांग उठाई. धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि परियोजना से जुड़े स्थानीय लोगों को केवल आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई.प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अभिजीत ग्रुप के दिवालिया घोषित होने के बाद एनसीएलटी की प्रक्रिया के तहत रेशमी मेटालिक कंपनी ने परियोजना को अपने अधीन लेकर पावर प्लांट को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू की थी. उस समय स्थानीय ग्रामीणों, विस्थापित परिवारों और मैनपावर कर्मियों से रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और क्षेत्रीय विकास को लेकर कई वादे किए गए थे.
आरोप है कि कंपनी ने उत्पादन और विस्तार कार्यों को प्राथमिकता दी, लेकिन स्थानीय लोगों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया.धरना पर बैठे मैनपावर कर्मियों ने कहा कि कई कर्मचारी पिछले 15 वर्षों से परियोजना में कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उन्हें कंपनी के पे-रोल पर शामिल नहीं किया गया. इसके अलावा 14 जनवरी से मजदूरों का भुगतान भी बंद है, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. कर्मियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लगातार वार्ता और समाधान का भरोसा देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती.
बताया गया कि कुछ दिन पूर्व भी ग्रामीणों एवं मैनपावर मजदूरों द्वारा अपनी मांगों को लेकर कंपनी का कार्य करीब 20 दिनों तक ठप करा दिया गया था. बाद में कंपनी प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद सात सूत्री मांग पत्र सौंपते हुए आंदोलन स्थगित किया गया था.आंदोलनकारियों का आरोप है कि वार्ता के दौरान मिले आश्वासनों पर अब तक अमल नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें दोबारा आंदोलन शुरू करने को मजबूर होना पड़ा.आंदोलन के दौरान सात सूत्री मांग पत्र भी जारी किया गया. इसमें मैनपावर कर्मियों को नियमित कर कंपनी पे-रोल पर नियुक्ति देने, 15 वर्षों के पीएफ एवं वीडीए की एकमुश्त क्षतिपूर्ति भुगतान करने, अधिग्रहित भूमि के लंबित मुआवजे का ग्राम सभा के माध्यम से भुगतान करने तथा झारखंड विस्थापन पुनर्वास नीति 2008 के तहत विस्थापित परिवारों को नौकरी अथवा एन्युटी पॉलिसी का लाभ देने की मांग शामिल है.
इसके अलावा आंदोलनकारियों ने परियोजना प्रभावित गांवों में सीएसआर के तहत स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य सुविधा, बस परिचालन, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई. साथ ही सभी वैधानिक एवं गैर-वैधानिक देनदारियों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई.
धरना स्थल पर मौजूद नेताओं और ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक कंपनी प्रबंधन लिखित समझौते के साथ मांगों पर कार्रवाई शुरू नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और कंपनी ने जल्द पहल नहीं की तो आंदोलन को और उग्र करते हुए प्लांट का संचालन पूरी तरह बाधित किया जाएगा.
धरना-प्रदर्शन शुरू होने के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है. स्थानीय लोगों की निगाहें अब जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. हालांकि समाचार लिखे जाने तक कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी.
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