News11 की खबर का बड़ा असर: डेढ़ साल से अधूरा शौचालय रातों-रात हुआ तैयार, लेकिन बच्चों को अब भी नहीं मिली पूरी सुविधा
न्यूज़11 भारत खलारी/डेस्क: खलारी प्रखंड की मायापुर पंचायत अंतर्गत केदल गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली को लेकर न्यूज़ 11 भारत में खबर प्रकाशित होने के बाद आखिरकार जिम्मेदारों की नींद टूटी. डेढ़ वर्ष से अधूरा पड़ा शौचालय, जो बच्चों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था, खबर प्रकाशित होते ही आनन-फानन में पूरा करने की कवायद शुरू कर दी गई. संवेदक द्वारा शौचालय में पुट्टी, रंग-रोगन तथा कुछ अन्य निर्माण कार्य तेजी से कराए गए, ताकि लंबे समय से लंबित कार्य को पूर्ण दिखाया जा सके.
गौरतलब है कि डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से विद्यालय में शौचालय और डीप बोरिंग निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था. लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय तक कार्य अधूरा पड़ा रहा. इसका खामियाजा विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों को भुगतना पड़ा, जिन्हें खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था. पेयजल की समुचित व्यवस्था भी नहीं थी, जिससे विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.
न्यूज़ 11 भारत द्वारा इस गंभीर लापरवाही को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद निर्माण एजेंसी सक्रिय हुई और अधूरे पड़े कार्यों को तेजी से पूरा करने में जुट गई. हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि केवल दीवारों पर रंग चढ़ा देने से विद्यालय की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं.
विद्यालय में अब भी सुरक्षित एवं नियमित पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था अधूरी है. शौचालय में बिजली कनेक्शन नहीं है, वायरिंग का कार्य अधूरा है, खिड़कियां नहीं लगाई गई हैं, पाइप फिटिंग का कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है और परिसर में साफ-सफाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसे में शौचालय का वास्तविक उपयोग और उसकी उपयोगिता अब भी सवालों के घेरे में है.
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि मीडिया इस मुद्दे को नहीं उठाता तो संभवतः यह निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरा ही पड़ा रहता. लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति करने के बजाय पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराए और शेष सभी कार्यों को तत्काल पूरा कराए.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डेढ़ वर्ष तक जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अधूरे निर्माण को नहीं देख सके, तो खबर प्रकाशित होने के कुछ ही दिनों के भीतर अचानक काम पूरा कराने की जल्दबाजी क्यों दिखी? यह सवाल निगरानी व्यवस्था, विभागीय जवाबदेही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
फिलहाल खबर का असर तो दिखा है, लेकिन विद्यालय के बच्चों को तब तक राहत नहीं मिलेगी, जब तक शौचालय पूरी तरह कार्यशील नहीं हो जाता और पेयजल सहित सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं कर दी जातीं.