राज्य में एक बार फिर सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्त की फाइल को बगैर अनुमति के किया वापस

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्त की फाइल को बगैर अनुमति के वापस कर दिया है. लोकभवन की ओर से कहा गया कि सरकार पहले आरटीआई एक्ट के नियमों को देख ले, पुनर्विचार करें, उसके बाद पुनः फाइल भेजे. यानी राज्य में एक बार फिर सूचना आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में अड़चन आई है. 

क्या आरटीआई एक्ट के अनुरूप राज्य सरकार ने सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए नाम की अनुशंसा की है?

प्राप्त जानकारी अनुसार राज्यपाल ने फाइल के साथ विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों द्वारा लोकभवन में की गई थी शिकायत और पत्रों को भी संलग्न किया गया था. बता दे कि आगामी 13 अप्रैल को सूचना आयुक्त मामले में हाईकोर्ट में भी सुनवाई होनी है.

बता दें कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 25 मार्च को हुई चयन समिति की बैठक में सूची को अंतिम रूप देकर राज्यपाल की अनुशंसा के लिए लोकभवन भेजा गया था. सूची को राज्यपाल की सहमति मिल जाने के बाद ही कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी करता. अब एक बार फिर मामला अधर में लटक गया है. यह भी बता दें कि झारखंड के सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के मामले पर झारखंड हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होनी है. 

झारखंड सरकार ने किन नामों की अनुशंसा की थी

सूचना आयुक्त पद के लिए राज्य सरकार ने अनुज कुमार सिन्हा, शिवपूजन पाठक, अमूल्य नीरज खलखो और तनुज खत्री के नामों की अनुशंसा की थी. लेकिन नामों के सार्वजनिक होने के बाद कई संस्थाओं और व्यक्तियों ने लोक भवन से लिखित रूप से शिकायत की थी. यह आपत्ति सूचना अधिकार अधिनियम का हवाला देकर की गयी थी. सबसे बड़ी आपत्ति प्रस्तावित नामों के राजनीतिक दल से सीधे जुड़े लोगों को लेकर थी. 

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