रांची सिविल कोर्ट से जीआर केस की फाइल गायब, पूर्व कर्मचारी पर धोखाधड़ी का आरोप दर्ज
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: रांची के सिविल कोर्ट से एक पुराने आपराधिक मामले की मूल फाइल रहस्यमय ढंग से गायब होने का मामला सामने आया है. जी.आर. केस संख्या-612/1995 से जुड़ी यह फाइल लापता होने पर कोर्ट प्रशासन में हड़कंप मच गया है. इस संबंध में प्रभारी न्यायाधीश प्रशांत कुमार वर्मा की लिखित शिकायत पर कोतवाली थाना में तत्कालीन सहायक जयगोविन्द राम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन पर आरोप है कि उन्होंने न केवल फाइल को गायब किया, बल्कि कोर्ट को गुमराह करने के लिए फर्जी हस्ताक्षरों वाली 'डिपोजिट स्लिप' भी प्रस्तुत की. मामले का खुलासा तब हुआ जब झारखंड हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिवीजन संख्या-15/2016 की सुनवाई के दौरान इस केस का रिकॉर्ड तलब किया. हाईकोर्ट द्वारा कई बार स्मार-पत्र भेजे जाने के बाद जब रिकॉर्ड की तलाश शुरू हुई, तो फाइल के गायब होने की जानकारी सामने आई. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जांच के दौरान सामने आया कि 1 अक्टूबर 2015 को यह फाइल तत्कालीन अपर न्यायायुक्त शंभु लाल साय की अदालत से न्यायिक दंडाधिकारी पारस नाथ उपाध्याय की अदालत में भेजी गई थी. इस फाइल को सहायक जयगोविन्द राम ने ही प्राप्त किया था. कोर्ट के बार-बार नोटिस के बावजूद आरोपी ने 26 जून 2025 को एक कथित 'डिपोजिट स्लिप' पेश कर दावा किया कि फाइल रिकॉर्ड रूम में जमा कर दी गई है. हालांकि, अभिलेखागार से मिली रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि न तो फाइल वहां जमा है और न ही प्रस्तुत रसीद पर किसी अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर हैं. संबंधित रजिस्टर में भी इसकी कोई प्रविष्टि नहीं पाई गई.पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फाइल आखिर कहां और किन परिस्थितियों में गायब हुई. ये भी पढ़ें- अनुकंपा नियुक्ति मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त, रांची डीसी को अवमानना नोटिस