दो दोस्तों की एक साथ उठी अर्थी, समसेरा करंजटोली में नहीं जला चूल्हा, मातम में डूबा पूरा गांव
प्रेम कुमार सिंह/न्यूज़11 भारत गुमला/डेस्क: भरनो प्रखंड के समसेरा करंजटोली गांव में शुक्रवार का दिन कभी नहीं भूलने वाला दिन बन गया.गांव की गलियों में जहां कभी युवाओं की हंसी-ठिठोली गूंजती थी, वहां शुक्रवार को सिर्फ सिसकियां,चीख-पुकार और मातम का माहौल था.गांव के हर घर की आंखें नम थीं और हर चेहरे पर गहरा दुख साफ झलक रहा था.आलम यह था कि पूरे गांव में एक भी घर में चूल्हा नहीं जला.लोग भोजन की चिंता छोड़कर उन दो परिवारों के दुख में शामिल थे,जिनके घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए.शुक्रवार की दोपहर लगभग दो बजे जैसे ही रोहित लोहरा (18) और शशिकांत उरांव (18) का शव पोस्टमार्टम के बाद रिम्स रांची से गांव पहुंचा,पूरे गांव में कोहराम मच गया. शव देखते ही दोनों युवकों के माता-पिता,भाई-बहन और अन्य परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे.मां की करुण पुकार और पिता की बेबसी देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं.हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध था.
एक साथ लौटे थे घर, एक साथ चली गई जिंदगी
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार,मृतक शशिकांत उरांव तमिलनाडु में मजदूरी का काम करता था और लगभग एक सप्ताह पूर्व ही अपने गांव लौटा था.वहीं रोहित लोहरा भी सिकंदराबाद में काम करने के बाद करीब एक माह पहले घर आया था.दोनों बचपन के मित्र थे और एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी माने जाते थे.परिजनों ने बताया कि दोनों दोस्त आगामी 6 जून को वापस अपने-अपने कार्यस्थल लौटने वाले थे.परिवार के लोग उनके भविष्य को लेकर सपने संजो रहे थे,लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.गुरुवार को दोनों अपने अन्य दोस्तों के साथ घूमने और पिकनिक मनाने के लिए पारस डैम की ओर गए थे.पिकनिक के दौरान उन्होंने अपने एक मित्र की केटीएम बाइक लेकर टेस्ट ड्राइव करने की बात कही और लामकाना की ओर निकल पड़े.इसी दौरान बेड़ो थाना क्षेत्र के लामकाना स्थित एकलव्य विद्यालय के समीप सड़क दुर्घटना में दोनों की दर्दनाक मौत हो गई.
एक दिन पहले साथ घूमने निकले,दूसरे दिन साथ उठी अर्थी
गांव के प्रबुद्धजनों एवं बुजुर्गों का कहना था कि शायद किसी ने कभी नहीं सोचा होगा कि जो दो दोस्त एक दिन पहले साथ घूमने निकले थे,उनकी अर्थी भी एक साथ उठेगी.दोनों की दोस्ती की चर्चा पूरे गांव में होती थी.हर समय साथ रहने वाले दोनों मित्र इस दुनिया से भी एक साथ विदा हो गए.जब दोनों शव गांव पहुंचे तो ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.हर कोई अंतिम बार अपने गांव के बेटों का चेहरा देखने पहुंचा था.कई महिलाएं रो-रोकर बेहोश हो गईं.युवाओं की आंखों में भी आंसू थे.गांव के माहौल को देखकर ऐसा लग रहा था मानो किसी एक परिवार नहीं,बल्कि पूरे गांव ने अपने बेटे खो दिए हों.
सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
शुक्रवार को पूरे गांव के लोग एकजुट होकर दोनों युवकों के शव को गांव से दूर जंगल किनारे अंतिम संस्कार के लिए ले गए.अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए.हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी—"ईश्वर ने इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी सजा क्यों दी?" पूरे विधि-विधान और परंपरा के अनुसार दोनों का अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम विदाई के समय माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे. परिजनों को सांत्वना देने वालों की भी आवाज भर्रा जा रही थी.
हादसे ने गांव को दिया बड़ा सबक
इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव के लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीरता से सोचने का संकल्प लिया. ग्रामीणों ने कहा कि यदि दोनों युवकों ने हेलमेट पहना होता तो शायद उनकी जान बच सकती थी. इस घटना ने गांव के युवाओं और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है. ग्रामीणों ने कहा कि अब वे स्वयं भी हेलमेट पहनेंगे और अपने बच्चों को भी बिना हेलमेट बाइक नहीं चलाने देंगे. लोगों का मानना है कि एक छोटी सी सावधानी कई परिवारों को ऐसी असहनीय पीड़ा से बचा सकती है.
शोक में डूबा है समसेरा करंजटोली
दो युवा बेटों की असमय मौत से समसेरा करंजटोली गांव पूरी तरह शोक में डूब गया है.गांव की गलियां सूनी हैं,लोगों के चेहरों पर उदासी है और हर घर में इस घटना की चर्चा हो रही है.कोई रोहित और शशिकांत की दोस्ती को याद कर रहा है तो कोई उनके अधूरे सपनों को. गांव वालों का कहना है कि दोनों मेहनतकश और मिलनसार युवक थे,जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों में काम कर रहे थे.लेकिन किस्मत ने उन्हें मंजिल तक पहुंचने से पहले ही छीन लिया.दो दोस्तों की एक साथ हुई मौत ने न केवल दो परिवारों की खुशियां उजाड़ी हैं,बल्कि पूरे समसेरा करंजटोली गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है.गांव आज भी इस सवाल का जवाब तलाश रहा है कि आखिर इतनी कम उम्र में इन दो जिंदगियों का सफर यूं अचानक क्यों थम गया.