झारखंड

ग्रामीण विकास विभाग टेंडर घोटाला मामले में ED की कार्रवाई तेज, बनाए गए 14 नए आरोपी

न्यूज11 भारत रांची/डेस्क: झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े टेंडर घोटाले में ED ने अपनी जांच तेज कर दी है. जांच एजेंसी ने इस मामले में राज्य सरकार के 14 विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों को नए आरोपी के रूप में शामिल किया है. इसके साथ ही इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है. पदानुसार बांटी जाती थी कमीशन की राशि ED की पूर्व जांच में खुलासा हुआ था कि टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल टेंडर मूल्य का लगभग 3 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था. जांच के अनुसार, यह कमीशन राशि पदानुसार बांटी जाती थी, जिसमें करीब 1.35 प्रतिशत हिस्सा तत्कालीन मंत्री को, 0.65 से 1 प्रतिशत विभागीय सचिव को, जबकि शेष राशि मुख्य अभियंताओं और उनके अधीनस्थ इंजीनियरों के बीच वितरित की जाती थी. कार्रवाई के दौरान 9 लोग गिरफ्तार  एजेंसी की जांच में यह भी सामने आया है कि 3,048 करोड़ रुपये के कुल टेंडर आवंटन के मुकाबले 90 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) अर्जित की गई. इस मामले में ED अब तक झारखंड के अलावा दिल्ली और बिहार में कुल 52 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. कार्रवाई के दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल और सहयोगी जहांगीर आलम फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. इसके अतिरिक्त, एजेंसी ने करीब 44 करोड़ रुपये मूल्य की तीन संपत्तियां कुर्क की हैं, जबकि पूर्व में 38 लाख रुपये नकद भी जब्त किए जा चुके हैं. 

इन्हें बनाया गया आरोपी  जिन 14 लोगों को नए सिरे से आरोपी बनाया गया है, उनमें मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त) सिंगराई टूटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार और प्रमोद कुमार; कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अनिल कुमार (सेवानिवृत्त); तथा सहायक अभियंता राम पुकार राम और रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त), और साथ ही पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं. जांच में PMLA की धारा 2(1)(u) के तहत 'अपराध से प्राप्त आय' (Proceeds of Crime) माने जाने वाले अवैध कमीशन की रकम को इकट्ठा करने, जमा करने और पहुँचाने में उनकी सक्रिय भागीदारी साबित हुई है. 

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