मजदूरों के हक की लड़ाई के प्रतीक थे कॉमरेड ए.के. रॉय
मुमताज अहमद/न्यूज़11 भारत खलारी/डेस्क: बिहार कोलियरी कामगार यूनियन (सीटू) की बैठक डकरा स्थित वीआईपी क्लब में आयोजित की गई. बैठक में जननेता और मजदूरों के मसीहा कॉमरेड एक के राय की जयंती मनाकर उनके संघर्षों और विचारों को याद किया गया.
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कॉमरेड ए.के. रॉय की विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज के श्रमिक और सामाजिक आंदोलनों के लिए मार्गदर्शक है. उन्होंने मजदूरों, आदिवासियों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी. वक्ताओं ने कहा कि मजदूर-आदिवासी एकता का उनका मॉडल यह संदेश देता है कि वास्तविक बदलाव सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि जमीन पर होने वाले जनसंघर्षों से आता है.
वक्ताओं ने कहा कि आज जब कॉरपोरेट वर्चस्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब ए.के. रॉय के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं. तीन बार सांसद और तीन बार विधायक रहने के बावजूद उन्होंने कभी पेंशन स्वीकार नहीं की. उनकी सादगी, ईमानदारी और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा उन्हें राजनीति में एक विशिष्ट पहचान दिलाती है.
बैठक में कहा गया कि समझौतावादी राजनीति के दौर में ए.के. रॉय ने हमेशा सच और जनहित के पक्ष में मजबूती से खड़े रहने का उदाहरण प्रस्तुत किया. उनके जीवन और संघर्षों से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है.
कार्यक्रम में रतिया गंझू, इरफान खान, जंगबहादुर राम, तौहीद अंसारी, सेयामजी महतो, संतोष मेहता, अमर भोक्ता, फारूक नवाब, दर्शन गंझू, सरफराज खान, हदीश अंसारी, दशरथ तुरी, उदय समेत बड़ी संख्या में यूनियन कार्यकर्ता और श्रमिक उपस्थित थे.