बसिया: अपर सचिव ने लोहड़ी गांव का किया दौरा, सामुदायिक वन प्रबंधन की सराहना
नीरज कुमार साहू/न्यूज11 भारत बसिया/डेस्क: वित्त-सह-निदेशक, कोषागार एवं संस्थागत वित्त, झारखंड सरकार के अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी द्वारा ग्राम सभा एवं समुदाय के सदस्यों से सीधे संवाद कर वन अधिकार अधिनियम तथा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना के क्रियान्वयन को समझने के उद्देश्य से बसिया प्रखंड के लोहड़ी गाँव का भ्रमण किया. इस अवसर पर जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन, बीडीओ सुप्रिया भगत,सीओ कामडारा सुप्रिया एक्का, एनजीओ प्रदान की टीम भी उपस्थित रही. प्रतिनिधिमंडल ने समुदाय के साथ खुला संवाद किया, जिसमें ग्राम सभा के सदस्यों ने अपने अनुभव, उपलब्धियाँ और समुदाय-आधारित वन प्रबंधन के लिए अपनी भविष्य की परिकल्पना साझा की.
संवाद के दौरान ग्राम सभा के सदस्यों ने बताया कि सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना गाँव के समग्र विकास की आधारशिला है और इसी के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का अभिसरण सुनिश्चित किया जाता है. मनरेगा के अंतर्गत गाँव में 35 जलग्रहण तालाब (डोभा) बनाए गए हैं, जिससे वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा कृषि एवं वन पुनर्स्थापन के लिए आवश्यक नमी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. आदि कर्मयोगी अभियान के माध्यम से ग्राम सभा को और अधिक सशक्त बनाया गया है, जिससे सहभागी योजना निर्माण, संस्थागत क्षमता विकास तथा स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विकास कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया मजबूत हुई है.
समुदाय ने एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का भी प्रदर्शन किया, जिनमें आम बागवानी, टमाटर की खेती, वनरोपण तथा सीडबॉल पहल प्रमुख हैं. स्थानीय वन प्रजातियों के हजारों सीडबॉल क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों में फैलाए गए हैं, ताकि प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिल सके. यह पहल वनरोपण कार्यों की पूरक है और जैव विविधता संरक्षण, वन आच्छादन में वृद्धि तथा दीर्घकालिक पारिस्थितिक पुनर्स्थापन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है.टीम द्वारा समुदाय-नेतृत्व वाले विकास मॉडल की सराहना की, जहाँ सशक्त ग्राम सभा, वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, CFRMP के माध्यम से विभिन्न योजनाओं का अभिसरण तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं. 35 जलग्रहण तालाबों का निर्माण, बागवानी एवं सब्जी उत्पादन का विस्तार, वन पुनर्स्थापन की पहल तथा मजबूत स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर जल सुरक्षा को सुदृढ़ किया है, आजीविका के अवसरों में वृद्धि की है, पारिस्थितिकीय लचीलेपन को मजबूत किया है तथा गाँव के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में ग्राम सभा की नेतृत्वकारी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया है.