झारखंड के जेलों में 81% पद रिक्त, खत्म हुई हाईकोर्ट की डेडलाइन, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: झारखंड की जेलों में 81 प्रतिशत से अधिक पद खाली होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि सभी रिक्त पदों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर नियुक्तियां सुनिश्चित की जाएं. साथ ही, अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश भी दिया गया था. नियुक्ति प्रक्रिया में नहीं हुई प्रगति राज्य सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है. पिछली सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत को अवगत कराया कि जेल सुधार से जुड़े मामले की सुनवाई लंबे समय से जारी है. जुलाई 2023 में यह तथ्य सामने आया था कि राज्य की जेलों में 81 प्रतिशत पद रिक्त हैं. उस समय अदालत ने शीघ्र नियुक्ति का निर्देश दिया था, किंतु अब तक सरकार की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है. मॉडल जेल मैनुअल पर सरकार का पक्ष सरकार ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जेल व्यवस्था में सुधार और मॉडल जेल मैनुअल तैयार करने की दिशा में कार्य किया जाना आवश्यक है. पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने इस पर प्रगति रिपोर्ट मांगी थी. सरकार ने सूचित किया कि अदालत के आदेश के बाद मॉडल जेल मैनुअल तैयार कर लिया गया है. स्वतः संज्ञान लेकर शुरू हुई थी सुनवाई जेल सुधार और मॉडल जेल मैनुअल से संबंधित मुद्दे पर झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. इस पहल का उद्देश्य राज्य की जेलों में सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करना है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारी संख्या में रिक्त पद जेल प्रशासन की कार्यक्षमता और बंदियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं. इसलिए इस समस्या का त्वरित समाधान आवश्यक है. ये भी पढ़ें- रांची: एसीबी की बड़ी कार्रवाई, सिल्ली अंचल कार्यालय के अमीन गणेश महतो गिरफ्तार