इबोला वायरस को लेकर WHO के माथे से आया पसीना, आम आदमी के माथे से टपकने लगा है! घनी आबादी तक पहुंचा नया स्ट्रेन
न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबालो वायरस को लेकर एक बार फिर चिंता जताई है. घनी आबादी में जिस प्रकार इसका प्रसार हो रहा है, उसको लेकर WHO प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस काफी चिंतित हो उठे हैं. चिंतित होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि कांगो में इबोला वायरस से संक्रमित होकर 134 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 500 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं. बता दें कि WHO इबोला वायरस को पहले ही अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर चुका है.
डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस इबोला वाय़रस के प्रभाव और प्रसार से ज्यादा सशंकित हैं. उन्होंने स्थिति को और स्पष्ट करते हुए कहा कि इस वायरस के मामले अब केवल दूरदराज इलाकों तक सीमित नहीं हैं, इनका प्रसार शहरी क्षेत्रों में भी होने लगा है. उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि जब घनी आबादी वाले शहरों में संक्रमण फैलेगा तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती है.
इबोला का नया स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक
इबोला वायरस कोई नया वायरस नहीं है, इसका प्रकोप पहले भी हो चुका है. लेकिन अभी चिंता की जो बात है, वह इसके नये स्टेरन की वजह से है. नए स्ट्रेन बंडीबुग्यो सामने आया है और इसका प्रसार काफी तेजी से हो रहा है. इसकी भयावहता के बारे में विशेषज्ञों ने बताया कि जब इससे पहली ज्ञात मौत हुई थी तब कई हफ्तों तक इस वायरस का पता नहीं चल पाया था. विशेषज्ञों ने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका परीक्षण वह सामान्य प्रकार के स्ट्रेन के रूप में कर रहे थे, सभी परिणाम नकारात्मक आए. लेकिन बाद में यह बंडीबुग्यो वायरस का मामले निकला. चिंता की एक बात यह भी है कि अभी इस नए स्ट्रेन के लिए कोई दवा या टीका उपलब्ध नहीं है. फिर भी शोधकर्ता यह उम्मीद कर रहे हैं कि विभिन्न प्रकार के इबोला के लिए प्रायोगिक टीके की खेप अमेरिका और ब्रिटेन से मिल सकती है.
इबोला का अब तक कैसे हुआ प्रसार
- इबोला वायरस का पहला मामला 1976 में अफ्रीका में सामने आया था. सूडान और कांगो में इसके मामले पाये गये थे.
- कांगो में अब तक सबसे ज्यादा बार इसके मामले सामने आए हैं. इबोला का अब जो अटैक हुआ है, वह इसका 17वां प्रकोप है.
- इबोला वायरस से 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.
- इबोला का प्रकोप सिर्फ अफ्रीका देशों तक ही सीमित नहीं रहा है. 2014 में अफ्रीका से बाहर, अमेरिका, ब्रिटेन और स्पेन भी इसका संक्रमण फैल चुका है.
इबोला वायरस से भारत को क्या खतरा है?
अफ्रीका में जो इबोला वायरस का प्रकोप बढ़ा है, उसके बाद भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट पर है. भारत में फिलहाल इसका कोई मामला सामने नहीं आया है और केवल 2014 में एक अंतरराष्ट्रीय यात्री के संक्रमित होने का मामला दर्ज किया गया था. स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इबोला वायरस के प्रसार का तरीका अलग होता है, इसलिए भारत में इसके कोविड-19 की तरह बड़े पैमाने पर फैलने की संभावना नहीं है।
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