दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करने से मंत्री पद तक: सुभेंदु सरकार में मंत्री बनी कलिता माजी, बदल दी सफलता की परिभाषा
न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजा में इन दिनों एक नाम खास चर्चा का विषय बना हुआ है. यह नाम है कलिता माजी का, जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष, मेहनत और जनविश्वास की ऐसी मिसाल पेश करती है, जो लोकतंत्र की असली ताकत को दर्शाती है. कभी घर-घर जाकर घरेलू काम करने वाली कलिता आज विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर मंत्री पद तक पहुंच चुकी हैं. उनकी यह उपलब्धि न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी है, बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
पूर्वी बर्दवान जिले के आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली कलिता माजी ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां किसी की मंजिल तय नहीं करतीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास सफलता का रास्ता बनाते हैं.
साधारण परिवार से निकलकर बनाई अपनी अलग पहचान पूर्व बर्दवान जिले की गुसकरा नगर पालिका के वार्ड नंबर-3, माझपुकुर पार की निवासी कलिता माजी का जीवन लंबे समय तक आर्थिक चुनौतियों से घिरा रहा. उनके पति दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं, जबकि उनका बेटा हाल ही में उच्च माध्यमिक परीक्षा में शामिल हुआ है. परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कलिता ने वर्षों तक लोगों के घरों में सफाई, कपड़े धोने और अन्य घरेलू कार्य किए. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. स्थानीय लोगों के बीच उनकी सादगी, ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई.
पहली हार ने नहीं तोड़ा हौसला राजनीति में कलिता माजी की एंट्री भी किसी साधारण कहानी की तरह नहीं रही. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर सभी को चौंका दिया था. हालांकि उस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली. तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अबेदानंद थंडर ने उस चुनाव में जीत दर्ज की थी, जबकि कलिता दूसरे स्थान पर रही थीं. हार के बावजूद उन्होंने अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के बीच लगातार काम करना जारी रखा. यही पांच वर्षों की मेहनत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
2026 में बदली तस्वीर, जनता ने दिया भरपूर समर्थन विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने एक बार फिर कलिता माजी पर भरोसा जताया. इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प था. तृणमूल कांग्रेस ने अनुभवी नेता और पेशे से वकील श्यामाप्रसाद लोहार को मैदान में उतारा था, जबकि वाम मोर्चे की ओर से चंचल कुमार माजी उम्मीदवार थे.तीन प्रमुख दलों के बीच हुए इस मुकाबले में कलिता माजी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,07,692 वोट हासिल किए. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामाप्रसाद लोहार को 12,535 मतों के अंतर से हराकर बड़ी जीत दर्ज की. इस नतीजे ने क्षेत्र की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया.
मंत्री बनने के बाद भावुक हुईं कलिता मंत्री पद की शपथ लेने के बाद कलिता माजी अपनी भावनाएं छिपा नहीं सकीं. उन्होंने पार्टी नेतृत्व और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जीवन उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाएगा. उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया, वह उनके लिए सम्मान की बात है. उनके अनुसार, यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की जीत है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखते हैं.
लोकतंत्र में अवसर की नई मिसाल कलिता माजी की कहानी भारतीय लोकतंत्र की उस शक्ति को सामने लाती है, जहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी जनसमर्थन के बल पर सत्ता के उच्च पदों तक पहुंच सकता है. उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में केवल संसाधन नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और निरंतर मेहनत भी सफलता की कुंजी बन सकते हैं. यह भी पढ़ें- CM हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की समीक्षा