'कलकत्ता' तेल के महासागर पर बसा है' सच साबित हो गया, अशोकनगर में मिला कच्चे तेल का अकूत भंडार! अंडमान तो बदलेगा इकोनोमी!
न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: कभी सुना था की कलकत्ता (कोलकाता) तेल के महासागर पर बसा हुआ है. यह बात तो उस समय सच साबित नहीं हुई, लेकिन अब लग रहा है कि यह बात सच हो रही है. पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में, कोलकाता से 50 किलोमीटर दूर स्थित अशोकनगर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मिला है. अशोकनगर में ओएनजीसी (ONGC) द्वारा खोजा गया यह ऑयल फील्ड भारत के लिए कारू का खजाना साबित हो सकता है. क्योंकि अनुमान है कि यहां पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का 240 मिलियन का विशाल भंडार है. यह न सिर्फ भारत की ऊर्जा की बड़ी आवश्यकता को पूरा कर सकता है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल भी प्रदान कर सकता है. 'अशोकनगर ऑयल फील्ड' से ओएनजीसी शीघ्र ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने जा रहा है. अभी तक जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार यहां से निकलने वाला तेल 'हाई-ग्रेड लाइट स्वीट क्रूड' है, जो रिफाइनिंग के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है. विशेषज्ञों द्वारा इस पूरे ऑयल रिज़र्व की एक अनुमानित वैल्यू भी निकाली गयी है, जो लगभग ₹45,000 करोड़ है.
2018 में ही ओएनजीसी ने इस ऑयल फील्ड को खोजा था
दुनिया के सामने ऊर्जा का संकट भले ही ताजा हो और भारत ऊर्जा के नए-नए विकल्प की तलाश भी कर रहा हो, लेकिन बता दें कि अशोकनगर में ओएनजीसी की यह खोज आज की नहीं, बल्कि थोड़ी पुरानी है. ओएनजीसी ने वर्ष 2018 में ही इस ऑयल फील्ड की खोज कर डाली थी. इसी के साथ यह पूर्वी भारत का पहला तेल उत्पादक क्षेत्र है. अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से कच्चे तेल के आयात पर भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी. इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल की बनी नई सरकार को भी रॉयल्टी व टैक्स के रूप में हजारों करोड़ का राजस्व मिलेगा. यानी शुभेन्दु अधिकारी की नई सरकार राज्य के लिए काफी शुभ साबित हो रही है.
बंगाल की खाड़ी में जोर-जोर से चल रही कच्चे तेल की खोज
भारत के सामने जब से ऊर्जा का संकट उत्पन्न हुआ है, देश में कच्चे तेल के सम्भावित ठिकानों पर रिसर्च और खोज के काम में काफी तेजी आयी है. बंगाल की खाड़ी में चार जगहों पर कच्चे तेल की खोज का अभियान चलाया गयाहै. कृष्णा-गोदावरी अंडमान बेसिन, पूर्णिया-महानदी बेसिन और कावेरी बेसिन में कच्चे तेल को खोजने का अभियान जोरों पर है. इनमें भारत सबसे ज्यादा आशान्वित अंडमान बेसिन को लेकर है. जहां विशेषज्ञों ने 10 किलोमीटर परत में कच्चे तेल के विशाल भंडार का अनुमान लगाया है. यहां 2 लाख करोड़ लीटर यानी 22 अरब बैरल तेल का भंडार हो सकता है. यहां 'गैस हाइड्रेट्स' यानी जमी हुई मीथेन गैस भी मिल सकती है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंडमान बेसिन से जितने तेल का अनुमान लगाया गया है. अगर उतना तेल निकल गया तो यह भारत की अर्थव्यवस्था को ही पूरी तरह से बदल कर रख देगा. भारत की जीडीपी जो इस समय 3.7 ट्रिलियन डॉलर है, वह 20 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है.
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