देश-विदेश

प्रेम विवाह करने वालों के लिए अजीबोगरीब फरमान, इस गांव में सामाजिक बहिष्कार का किया ऐलान!

AI Generated Image

न्यूज़11 भारत रांची/डेस्क: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पंचेवा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज, कानून और संविधान के बीच टकराव को उजागर कर दिया हैं. गांव की एक कथित पंचायत बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवती और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की खुली घोषणा की जा रही हैं. 

वायरल वीडियो में एक युवक यह कहते हुए साफ सुना जा सकता है कि यदि गांव का कोई लड़का या लड़की प्रेम विवाह करता है, तो उसे गांव से सामाजिक रूप से बेदखल कर दिया जाएगा. इतना ही नहीं, शुरुआत में युवक-युवती के साथ उनके परिवारों को भी बहिष्कृत करने की बात कही गई. वीडियो में यह भी तय किया जाता दिखता है कि ऐसे परिवारों को दूध नहीं दिया जाएगा, उन्हें किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होने दिया जाएगा, गांव की बैठकों से दूर रखा जाएगा और मजदूरी तक पर नहीं बुलाया जाएगा.

मौन समर्थन या सामूहिक फैसला? इस वीडियो का एक गंभीर पहलू यह भी है कि घोषणा के दौरान वहां कई ग्रामीण और युवक मौजूद थे, जो किसी भी तरह का विरोध करते नजर नहीं आते. यह दृश्य संकेत देता है कि यह महज एक व्यक्ति का बयान नहीं, बल्कि भीड़ की मौन सहमति से लिया गया सामूहिक निर्णय हो सकता हैं. यही कारण है कि मामला और अधिक संवेदनशील हो गया हैं. 

संविधान बनाम पंचायत का फरमान भारतीय संविधान हर नागरिक को समानता और स्वतंत्रता का अधिकार देता हैं. अनुच्छेद 14 समानता की गारंटी देता है, अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति और जीवन की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 21 सम्मान के साथ जीवन जीने और निजी निर्णय लेने का अधिकार सुनिश्चित करता हैं. सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से विवाह करने के लिए स्वतंत्र है, चाहे समाज या परिवार इससे सहमत हो या नहीं.

वीडियो वायरल होने के बाद जब ग्रामीणों से बात की गई, तो उन्होंने दावा किया कि वे प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं है लेकिन उनका विरोध घर से भागकर की जाने वाली शादियों को लेकर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से गांव का माहौल खराब हो रहा है और इसी डर से कई माता-पिता ने अपनी बेटियों का स्कूल-कॉलेज जाना तक बंद कर दिया हैं. ग्रामीण यह भी कहते है कि प्रेम विवाह तभी होना चाहिए जब दोनों पक्षों के माता-पिता की सहमति हो. उनका तर्क है कि घर से भागकर शादी करने के बाद जब लड़कियां लौटती है, तो अक्सर माता-पिता के खिलाफ बयान देती है, जिससे परिवार को सामाजिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती हैं. 

बयान में बदला रुख, परिवारों को राहत का दावा मामला तूल पकड़ने के बाद अब ग्रामीण यह कह रहे है कि युवक-युवती का ही बहिष्कार होगा, उनके माता-पिता का नहीं. घर से भागकर शादी करने वाली एक युवती के पिता ने भी ग्रामीणों के इस बदले रुख से सहमति जताई और कहा कि गांव में उन पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं है और उन्हें सहयोग मिल रहा हैं. 

पुलिस का रुख: जांच के बाद होगी कार्रवाई रतलाम के एसपी अमित कुमार ने इस वायरल वीडियो को लेकर कहा कि उन्हें प्रेम विवाह के खिलाफ दिए गए एक वीडियो की जानकारी मिली है और मामले की जांच कराई जाएगी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी व्यक्ति या पंचायत संविधान से ऊपर नहीं हैं. यदि कोई कानून के दायरे से बाहर जाकर फैसला करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

यह भी पढ़े: Jharkhand Weather: झारखंड में सर्दी का असर खत्म, धूप ने बढ़ाई गर्माहट, मौसम हुआ सुहावना