सुरों के एक युग का अंत है आशा भोंसले का जाना! संगीत की बड़ी विरासत छोड़ गयी हैं आशा ताई
प्रमोद जायसवाल/न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और उनकी बहन आशा भोंसले ने भारतीय संगीत को उस मुकाम पर पहुंचाया जो जब तक यह धरती है, तब तक उनके नाम से रोशन होता रहेगा. लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोंसले का दुनिया छोड़ कर चला जाना सिर्फ किसी शख्सियत का जाना नहीं है, बल्कि यह एक युग का अन्त है. सुरों के एक युग का अन्त है. सुरों की मल्लिका के रूप में संगीत की दुनिया पर राज करने वाली आशा भोंसले आज संगीत की इस दुनिया को सूना कर चली गयी है. लेकिन अपने पीछे वह संगीत की जो विरासत छोड़ गयी हैं, वह हमेशा हमारे बीच उनके होने का अहसास दिलाता रहेगा. आशा भोंसले के दुनिया छोड़कर चले जाने से सिर्फ संगीत की दुनिया के लोग ही नहीं, पूरा देश शोक में है. जैसे ही हृदयाघात से उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर आयी पूरा देश, दुनिया भर में उनके प्रशंसकों ने उनके लिए दुआएं शुरू कर दीं. पर तमाम चिकित्सकीय कोशिशें और दुआएं काम नहीं आयीं और 92 वर्ष की यह महान गायिका दुनिया को अलविदा कह गयीं. आज देशभर में उनके प्रशंसकों की आंखें नम हैं, क्योंकि ये आंखें जानती हैं कि वे अब अपनी आशा ताई को कभी नहीं देख पाएंगी. पर इस बात का उन्हें सुकून है कि संगीत के रूप में उनकी विरासत सदियों तक उनके कानों और दिलों को खुशियां देती रहेंगी. पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले ने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली.
मील का पत्थर साबित होने वाली फिल्में
- नया दौर (1957): बी. आर. चोपड़ा की ‘नया दौर’(1957) में मो. रफी के साथ गाए ‘माँग के हाथ तुम्हारा....’, ‘साथी हाथ बढ़ाना...’ और ‘उड़े जब जब जुल्फे तेरी...’ ने उन्हें खास पहचान दी।
- तीसरी मंजिल (1966):- राहुल देव वर्मन की ‘तीसरी मंजिल’(1966) ने आशा भोंसलों को काफी प्रसिद्धि दी है. वेस्टर्न आधारित गीत‘आजा आजा...’ को आशा भोंसले ने एक चैलेंज के रूप में गाया था. जो कि आज भी एक सुपरहिट गीत है. ओ हसीना जुल्फो वाली... और ओ मेरे सोना रे.... ने तहलका मचा दिया था.
- उमराव जान (1981): रेखा अभिनीत ‘उमराव जान’(1981) आशा भोंसले के संगीत करियर का एक मील का पत्थर है. इस फिल्म में गाई हुई इनकी गजलें आज भी दीवाना बन देती हैं. दिल चीज क्या है..., इन आँखों की मस्ती के..., ये क्या जगह है दोस्तों... और जुस्त जू जिसकी थी.. इन गानों की जुस्तजू आज भी संगीत के दीवानों को होती है. संगीतकार खय्याम की तैयार की गयी गज़लो को आशा भोंसले ने न सिर्फ सफलतापूर्वक गाया बल्कि उन्हें संगीत के अगले मुकाम तब भी पहुंचा दिया.
- रंगीला (1995): रंगीला फिल्म जब आयी थी तब तब आशा भोंसले 62 वर्षीय की हो चुकी थी और उन्होंने एक युवा अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर पर फिल्माये गये गाने से फिल्म के साथ संगीत के माहौल को भी रंगीला कर दिया था.
ये चार फिल्म ही आशा भोंसले के संगीत करियर की उपलब्धि नहीं है, उनके बेहतरीन गानों की फेहरिस्त इतनी लम्बी है कि उन्हें चंद शब्दों में बयां ही नहीं किया जा सकता.
पिया तू अब तो आजा, 'मोनिका, ओह माय डार्लिंग' (कारवां), . दम मारो दम ('हरे रामा हरे कृष्णा, चुरा लिया है तुमने जो दिल को ('यादों की बारात' ये मेरा दिल (डॉन'), मेरा कुछ सामान (इजाजत), राधा कैसे न जले (लगान) और आओ हुजूर तुमको (किस्मत) ये चंद गाने आशा भोंसले के करियर के बेहतरीन गानों में शुमार हैं. उनकी आवाज ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया और आगे भी उनकी आवाज का जादू संगीत की दुनिया को प्रेरित करती रहेगी.
आशा भोंसले एक परिचय
- जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था.
- संगीत करियर की शुरुआत मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ के गाने ‘चला चला नवबाला’ से की.
- हिंदी सिनेमा में का पहला गाना 1948 में ‘चुनरिया’ में ‘सावन आया रे’ गाया था.
- आशा भोसले के नाम 14 भाषाओं में 12000 से अधिक गाने गाने की उपलब्धि है.
- गानों को लेकर उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है.
- 2008 में भारत के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित हो चुकी हैं..
- 1997 में ग्रैमी पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुई थी. यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय महिला गायिका थीं.
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