मोतिहारी में SFC मजदूरों की हड़ताल, न्यूनतम मजदूरी और PF-ESI गड़बड़ी पर बवाल
न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
मनीष कुमार / मोतीहारी - राज्य खाद्य निगम (SFC) से जुड़े लोडिंग-अनलोडिंग मजदूरों का आंदोलन अब तेज हो गया है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर फूड एंड एलाइड वर्कर्स यूनियन के बैनर तले मंगलवार को जिलेभर में मजदूरों ने हड़ताल कर जोरदार प्रदर्शन किया और जिला प्रबंधक कार्यालय का घेराव किया।
हाईलाइट्स :
- मोतिहारी में SFC मजदूरों की हड़ताल, जिला प्रबंधक कार्यालय का घेराव
- न्यूनतम मजदूरी, बकाया भुगतान और PF-ESI गड़बड़ी को लेकर विरोध
- हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लागू नहीं हुआ नया मजदूरी दर
- खाद्य आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
अनियमितताओं का आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन का आरोप है कि न्यूनतम मजदूरी, बकाया भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार अनियमितता बरती जा रही है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। हड़ताल के कारण राज्य के खाद्य आपूर्ति तंत्र पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हुआ पालन
मजदूरों ने बताया कि उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2025 को श्रमिकों के पक्ष में आदेश दिया था। इसके बाद विभागीय निर्देश भी जारी हुए, जिसमें न्यूनतम मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया था। बावजूद इसके पूर्वी चंपारण जिले में आदेशों का पालन नहीं हो रहा है।
मजदूरी दर बढ़ी, लेकिन भुगतान पुराने रेट पर
यूनियन के अनुसार, 1 अक्टूबर 2022 से न्यूनतम मजदूरी दर 10.20 रुपये प्रति इकाई तय की गई थी, जिसे हर छह महीने में संशोधित किया गया और मार्च 2026 तक यह बढ़कर 11.65 रुपये प्रति इकाई हो गई। इसके बावजूद कई जगहों पर मजदूरों को पुराने दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनका भारी बकाया बन गया है।
PF-ESI कटौती पर भी उठे सवाल
मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके वेतन से 12 प्रतिशत PF और 0.75 प्रतिशत ESI की कटौती की जा रही है, लेकिन यह राशि संबंधित खातों में जमा नहीं हो रही। यूनियन ने इस मामले में जिला प्रबंधक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
खाद्य आपूर्ति पर संकट की आशंका
हड़ताल की घोषणा के बाद प्रशासन और SFC अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं, ताकि खाद्य आपूर्ति पर संभावित संकट को टाला जा सके।
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