महाशिवरात्रि पर शेरघाटी के तीन प्रमुख शिवालयों में उमड़ी आस्था की भीड़, भक्तिमय हुआ पूरा शहर
राहुल कुमार/न्यूज11 भारत
शेरघाटी/डेस्क: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शेरघाटी शहर पूरी तरह शिवमय हो उठा. शहर के तीन प्रमुख शिवालयों में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही. तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं. हाथों में पूजा की थाली, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, गंगाजल और धतूरा लिए श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए. 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.
मंदिरों को आकर्षक रोशनी और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था. जगह-जगह भजन-कीर्तन, शिव चर्चा और धार्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की. महिलाओं, युवतियों और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही. कई श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखकर रात्रि जागरण भी किया.
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन व पुलिस बल की तैनाती की गई थी. स्वयंसेवकों द्वारा श्रद्धालुओं को कतारबद्ध कर शांतिपूर्वक दर्शन कराया गया. मंदिर परिसर के आसपास साफ-सफाई, पेयजल और प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था की गई थी.
इधर तीन शिवाला के प्रांगण में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शिव विवाह का भव्य आयोजन किया गया. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह पूरे विधि-विधान एवं उत्साह के साथ संपन्न कराया गया. आयोजनकर्ता संजय प्रसाद वर्मा ने बताया कि वे लगभग 40 वर्षों से शिव विवाह का आयोजन करते आ रहे हैं और जीवन पर्यंत इस परंपरा को निभाते रहेंगे.
शिव विवाह के अवसर पर भगवान शिव की प्रतीकात्मक बारात एक शिवाला से निकाली गई, जो गाजे-बाजे और श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच तीन शिवाला पहुंची. वहां माता पार्वती की प्रतिमा के समक्ष पारंपरिक रीति से समधी मिलन की रस्म अदा की गई. बारात के स्वागत में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की और मंगल गीत गाए. मंदिर के पुजारी ने बताया कि शिव विवाह का आयोजन दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समरसता का संदेश देता है. यह पर्व श्रद्धा, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रतीक है. देर रात तक शिवालयों में पूजा-अर्चना और जागरण का सिलसिला जारी रहा. महाशिवरात्रि के अवसर पर शेरघाटी में आस्था, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. शहर का वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में सराबोर रहा.
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